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देश की रूह – हिंदी

हिंदी देश की आत्मा में बसती है दोस्तों शरीर नश्वर पर आत्मा कभी नहीं मरती आत्मा को अगर हम अजर – अमर मानें तो हिंदी सदा हमारे लफ़्ज़ों में, रूह में है हिंदी पर गर्व है मुझे, हिंदी से मुझे प्यार है विज्ञान की छात्रा होने के कारण दसवीं तक हिंदी पढ़ी, वो भी मात्र […]Read More

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“आत्महत्या विकल्प नहीं”

जब नारी खुद में रखती इतना दम बिना उफ्फ झेले घर-समाज के गम पलायन ही क्या नीलपरी मुसीबत का अंत क्यों आज नर में दमखम इतना कम वैसे तो हर एक जान की कीमत अनमोल है, परन्तु इतने उच्च पदासीन व्यक्ति का ऐसा दुःखद अंत सामाजिक और राष्ट्रीय क्षति भी है। तीस वर्षीय आइपीएस सुरेंद्र […]Read More

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इन किताबों में कुछ तो होता है

मालविका हरिओम   इन किताबों में कुछ तो होता है ओस बनकर जो मन भिगोता है इल्म के एक-एक मोती को रूह की तार में पिरोता है कोई तो है जो ग़म सँजोता है इन किताबों में कुछ तो होता है ज़िन्दगी के हसीन पन्नों पर जब वो तारीख़ मुस्कुराती है तेरी यादों की तितलियों […]Read More

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